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छिंदवाड़ा: सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत' घोषित 12 साल का बच्चा हुआ जीवित, प्रशासन ने सुधारी बड़ी गलती

मामला ग्राम पंचायत थाबड़ीकला का था, जहां बलराम सोनी के 12 वर्षीय बेटे अनंत सोनी की समग्र आईडी में गलती से मृत दर्ज कर दिया गया था। इस वजह से बच्चे का स्कूल में दाखिला अटक गया था और उसे मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ भी बंद हो गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
छिंदवाड़ा: सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत' घोषित 12 साल का बच्चा हुआ जीवित, प्रशासन ने सुधारी बड़ी गलती
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एक साल के संघर्ष के बाद मिली राहत

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी दस्तावेजों की लापरवाही ने एक 12 वर्षीय बच्चे के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया था। ग्राम पंचायत थाबड़ीकला के रहने वाले बलराम सोनी के बेटे अनंत सोनी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था। इस तकनीकी गलती के कारण बच्चा पिछले एक साल से सरकारी योजनाओं के लाभ और स्कूल में दाखिले जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित था।

अनंत के पिता बलराम सोनी ने बताया कि उनके बेटे को समग्र आईडी में 'मृत' दर्ज कर दिया गया था। इस एक गलती ने परिवार को प्रशासन के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया। बच्चा जीवित होने के बावजूद कागजों में मृत था, जिसके चलते न तो उसका स्कूल में एडमिशन हो पा रहा था और न ही उसे सरकार द्वारा मिलने वाली किसी भी प्रकार की सहायता मिल पा रही थी।

दर-दर भटकता रहा परिवार

इस समस्या के समाधान के लिए बलराम सोनी ने पिछले एक साल में हर संभव प्रयास किया। उन्होंने पंचायत सचिव से लेकर जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई। रिकॉर्ड के अनुसार, 29 दिसंबर 2025 को उन्होंने जनपद पंचायत छिंदवाड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय में भी आवेदन दिया गया।

इतना ही नहीं, परिवार ने 20 मई 2026 को स्थानीय सांसद विवेक बंटी साहू को भी इस मामले से अवगत कराया था। बावजूद इसके, सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक घूमती रहीं और बच्चे की समस्या जस की तस बनी रही। एक पिता के लिए अपने जीवित बेटे को कागजों में जीवित साबित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन

जब यह मामला सार्वजनिक हुआ और मीडिया में प्रमुखता से उठाया गया, तो जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। खबर प्रकाशित होने के महज तीन घंटे के भीतर अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और समग्र आईडी में सुधार की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया। प्रशासनिक सुधार के बाद अब अनंत सोनी को रिकॉर्ड में जीवित दर्ज कर दिया गया है।

इस सुधार के साथ ही बच्चे के लिए शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का रास्ता फिर से खुल गया है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने परिवार को बड़ी राहत दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जवाबदेही पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि जिस काम को प्रशासन ने मीडिया में खबर आने के बाद चंद घंटों में कर दिया, उसे करने के लिए एक साल का समय क्यों लगा? क्या बिना मीडिया के हस्तक्षेप के गरीब परिवार को न्याय नहीं मिल सकता था? अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं।

फिलहाल, अनंत सोनी का परिवार राहत की सांस ले रहा है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे छोटी सी प्रशासनिक चूक किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है और कैसे जवाबदेही तय न होने के कारण आम आदमी को लंबे समय तक प्रताड़ित होना पड़ता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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