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छतरपुर: जर्जर सड़क से परेशान 20 गांवों के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन को सौंपा अल्टीमेटम

छतरपुर जिले के बड़ामलहरा ब्लॉक में गरखुवां मार्ग की जर्जर हालत से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पक्की सड़क के निर्माण की मांग करते हुए अल्टीमेटम दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

29 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
छतरपुर: जर्जर सड़क से परेशान 20 गांवों के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन को सौंपा अल्टीमेटम
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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बड़ामलहरा ब्लॉक में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। क्षेत्र के करीब 20 गांवों को जोड़ने वाले गरखुवां मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों और कीचड़ के कारण हो रही दिक्कतों से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

20 गांवों की जीवनरेखा बनी मुसीबत

गरखुवां मार्ग इस पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिसका उपयोग रोजाना हजारों लोग करते हैं। इसमें किसान, स्कूली छात्र और बीमार व्यक्ति शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत न होने के कारण यह पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। करीब 2 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है, क्योंकि सड़क का नामोनिशान मिट चुका है और केवल बड़े-बड़े गड्ढे ही शेष बचे हैं।

बारिश के मौसम में इस मार्ग की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। गड्ढों में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को यह समझ नहीं आता कि सड़क कहां है और गहरा गड्ढा कहां। इसके चलते आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चों का समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है, वहीं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

खेती-किसानी पर भी गहरा असर

सड़क की दुर्दशा का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और खेती पर भी पड़ रहा है। किसानों को अपने खेतों तक कृषि उपकरण और खाद-बीज ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फसल कटाई के समय उपज को बाजार तक पहुंचाने में भी यह खराब सड़क सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

प्रशासन की उदासीनता से तंग आकर अब ग्रामीणों ने लिखित में अपनी मांगें रखी हैं। उन्होंने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें स्पष्ट रूप से सड़क के नवीनीकरण और पक्की सड़क के निर्माण की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे और अधिक इंतजार करने की स्थिति में नहीं हैं।

8 दिन का अल्टीमेटम और घेराव की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन को 8 दिनों का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस तय समय सीमा के भीतर सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया या प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। आंदोलन के अगले चरण में क्षेत्र के सभी ग्रामीण एकजुट होकर तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की जाती है और आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन 8 दिनों के भीतर इस समस्या का समाधान निकालता है या ग्रामीणों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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