छतरपुर का आधुनिक बस टर्मिनल परियोजना पांच साल से फाइलों में कैद, लागत में 15 करोड़ का इजाफा
छतरपुर शहर को आधुनिक अंतरराज्यीय बस टर्मिनल यानी ISBT देने की योजना पांच साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2021 में शुरू हुई परियोजना के लिए हाउसिंग बोर्ड ने करीब आठ महीने पहले प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) शासन को भेजी थी, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिली है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मध्य प्रदेश के छतरपुर शहर में यात्रियों की सुविधा के लिए प्रस्तावित आधुनिक अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) का सपना पिछले पांच वर्षों से केवल कागजों तक ही सीमित है। वर्ष 2021 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रशासनिक सुस्ती और मंजूरी में हो रही देरी के कारण यह महत्वपूर्ण योजना फाइलों के बीच उलझकर रह गई है।
मंजूरी के इंतजार में अटकी परियोजना
हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस परियोजना के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) तैयार कर करीब आठ महीने पहले शासन को भेजी गई थी। नियमानुसार, जब तक शासन स्तर से इस रिपोर्ट को हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। पीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसमें निर्माण कार्य, यात्री सुविधाओं का खाका और बजट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
वर्तमान में पूरी परियोजना की गति शासन की स्वीकृति पर टिकी है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद ही ड्राइंग और निर्माण से जुड़ी अन्य तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी। तब तक शहर के बस यात्रियों को पुरानी और अव्यवस्थित व्यवस्था के बीच ही सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
लागत में 15 करोड़ की भारी बढ़ोतरी
परियोजना में हो रही इस लंबी देरी का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। निर्माण सामग्री की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत में अब तक करीब 15 करोड़ रुपए का इजाफा हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वीकृति में इसी तरह देरी होती रही, तो भविष्य में परियोजना की लागत और भी बढ़ सकती है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ना तय है।
प्रस्तावित बस टर्मिनल के लिए महोबा रोड के समीप नगर पालिका द्वारा डेढ़ से दो हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी है। हाउसिंग बोर्ड इस पूरी प्रक्रिया का नोडल विभाग है, लेकिन जमीन उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न हो पाना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
यातायात व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
छतरपुर शहर में यात्रियों की संख्या और बसों के संचालन में लगातार वृद्धि हो रही है। मौजूदा बस स्टैंड पर अत्यधिक दबाव होने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था अक्सर चरमरा जाती है। महोबा रोड पर बनने वाला आधुनिक बस टर्मिनल न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि शहर के मुख्य मार्गों पर बसों के कारण होने वाले जाम से भी मुक्ति दिलाएगा।
इस टर्मिनल के निर्माण से बसों का संचालन व्यवस्थित होगा और यात्रियों के लिए वेटिंग एरिया, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। शहर के विकास के लिए इसे एक अत्यंत आवश्यक परियोजना माना जा रहा है, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य का शुरू न होना स्थानीय निवासियों के लिए निराशा का विषय बना हुआ है।
अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर लंबित पीपीआर को कब तक मंजूरी मिलती है और क्या आने वाले समय में छतरपुर को आधुनिक बस टर्मिनल की सौगात मिल पाएगी या यह परियोजना आने वाले वर्षों में भी केवल फाइलों में ही दबी रहेगी।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!