चंडीगढ़ मतदाता सूची में भारी कटौती पर सांसद मनीष तिवारी ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से मांगी स्पष्टीकरण
चंडीगढ़ में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव विभाग से पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को SIR के दौरान मतदाताओं की संख्या में हुई बड़ी कमी पर सवाल उठाए हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मतदाता सूची में भारी गिरावट पर चिंता
चंडीगढ़ में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या में आई भारी कमी पर स्पष्टीकरण मांगा है। तिवारी ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित न हो।
सांसद के अनुसार, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चंडीगढ़ में कुल 6,59,805 मतदाता पंजीकृत थे। हालांकि, 2 अगस्त 2026 को जारी की गई मसौदा मतदाता सूची में यह संख्या घटकर मात्र 4,50,282 रह गई है। आंकड़ों के इस बड़े अंतर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह कमी लगभग 31.76 प्रतिशत के आसपास है।
वार्ड वार आंकड़ों में विसंगतियां
सांसद मनीष तिवारी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, शहर के 35 वार्डों में मतदाताओं की संख्या में औसतन 33.72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कुछ विशिष्ट वार्डों के आंकड़ों पर नजर डाली जाती है। वार्ड-6 में 52.76 प्रतिशत, वार्ड-24 में 46.08 प्रतिशत, वार्ड-30 में 45.48 प्रतिशत और वार्ड-12 में 42.93 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम सूची से गायब हुए हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त को हुई SIR-2026 की बैठक में यह बताया गया था कि पुराने मतदाताओं में से करीब 3,02,000 लोगों को बिना किसी जांच के बरकरार रखा गया है। वहीं, 1,38,070 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। सांसद ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के पीछे का आधार क्या है।
प्रशासन से मांगी गई विस्तृत जानकारी
मनीष तिवारी ने चुनाव अधिकारी से मांग की है कि SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए प्रत्येक मतदाता का नाम, उनका वार्ड, बूथ नंबर और नाम हटाने का ठोस कारण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने उन सभी मतदाताओं की सूची भी मांगी है जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि उनकी वर्तमान स्थिति का पता चल सके। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाताओं का नाम सूची से हटना एक गंभीर विषय है।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया है कि चुनाव विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ये नाम तकनीकी त्रुटियों के कारण हटे हैं या इसके पीछे कोई अन्य प्रक्रियात्मक कारण है। उन्होंने प्रशासन से पूरी पारदर्शिता बरतने की अपील की है ताकि आम जनता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।
अंतिम सूची का इंतजार
वर्तमान में जारी की गई सूची केवल एक मसौदा है। चुनाव विभाग की ओर से SIR प्रक्रिया के अंतर्गत दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसलिए, यह स्पष्ट है कि अंतिम सूची जारी होने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि वास्तव में कितने मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से सूची से बाहर हुए हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें मृत मतदाताओं, स्थानांतरित हो चुके लोगों या दोहरी प्रविष्टि वाले नामों को हटाया जाता है। हालांकि, सांसद द्वारा उठाए गए बड़े पैमाने पर कमी के मुद्दे के बाद चुनाव विभाग को अब इन आंकड़ों का विस्तृत ब्यौरा देना पड़ सकता है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!