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बिजनौर: अगवानपुर गांव में वन विभाग के पिंजरे में फंसा खूंखार गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

बिजनौर के अफजलगढ़ क्षेत्र के अगवानपुर गांव में एक गुलदार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया। शिकार की तलाश में आया यह गुलदार किसान के खेत में फंसा, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

26 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
बिजनौर: अगवानपुर गांव में वन विभाग के पिंजरे में फंसा खूंखार गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
मूल स्रोत

चार दिन के इंतजार के बाद पिंजरे में कैद हुआ गुलदार

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में लंबे समय से दहशत का पर्याय बने गुलदार को पकड़ने में वन विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अफजलगढ़ क्षेत्र के अगवानपुर गांव में वन विभाग द्वारा स्थापित किए गए पिंजरे में एक नर गुलदार फंस गया। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने काफी हद तक राहत महसूस की है, क्योंकि पिछले कई दिनों से इस इलाके में जंगली जानवर की सक्रियता से लोग डरे हुए थे।

घटनाक्रम के अनुसार, बिरला फार्म चक रोड के समीप स्थित किसान नायब सिंह के खेत में वन विभाग ने 22 अगस्त को पिंजरा लगाया था। शिकार की तलाश में घूम रहा यह गुलदार आखिरकार चार दिन बाद पिंजरे में लगी तकनीक का शिकार हो गया। सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर काम करने निकले, तो उन्हें पिंजरे के भीतर से गुलदार के दहाड़ने की आवाजें सुनाई दीं, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

पिंजरे में गुलदार के फंसे होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना पाकर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ गुलदार का रेस्क्यू किया। बाद में उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए सुरक्षित पीली डैम चौकी ले जाया गया।

वन दरोगा सत्यवीर सिंह ने बताया कि पकड़ा गया गुलदार नर है और उसकी उम्र लगभग आठ से नौ वर्ष के बीच आंकी गई है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन रक्षक अंकित चौहान और मुजीबुर्रहमान सहित विभाग के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। वन विभाग अब इस गुलदार को लेकर आगे की विभागीय कार्रवाई में जुटा है।

इलाके में गुलदार का बढ़ता आतंक

बिजनौर जिले में गुलदार का आतंक कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय में इस जंगली जानवर के हमलों ने दर्जनों लोगों की जान ली है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि यह गुलदार पालतू जानवरों और मवेशियों का भी शिकार करता रहा है, जिससे किसानों और पशुपालकों में भारी रोष और भय का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुलदार की बढ़ती आबादी और रिहायशी इलाकों में उनकी घुसपैठ ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने में कतराते हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूरे जिले में गुलदार को पकड़ने के लिए अब तक 120 से अधिक पिंजरे लगाए जा चुके हैं, साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

हालांकि, इन तमाम प्रयासों के बावजूद गुलदार के हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि इस क्षेत्र को गुलदार के आतंक से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रशासन का कहना है कि वे लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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