बिहार में विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में शिक्षकों का बिगुल, 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश की घोषणा
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के जरिए महाविद्यालयों को अपने अधीन करने की कोशिश कर रही है। यह निर्णय शिक्षकों के सम्मान और स्वायत्तता के खिलाफ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

प्रस्तावित अधिनियम के खिलाफ शिक्षकों में भारी आक्रोश
बिहार के गया कॉलेज परिसर में विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार इस नए अधिनियम के माध्यम से महाविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त कर उन्हें सीधे अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर रही है। उनका मानना है कि यह कदम न केवल शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा।
आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हुए शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि वे इस बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे। शिक्षकों का तर्क है कि यदि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, तो कॉलेज के शिक्षकों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। विरोध के पहले चरण में 5 से 8 अगस्त तक शिक्षक काला बिल्ला लगाकर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।
10 अगस्त को सामूहिक अवकाश और आगे की रणनीति
विरोध प्रदर्शन को और धार देते हुए शिक्षकों ने 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश पर रहने का निर्णय लिया है। इसके बाद 11 अगस्त से 25 अगस्त तक प्रतिदिन आधे घंटे का सांकेतिक धरना दिया जाएगा। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो पटना में एक बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
शिक्षक संघ की प्रतिनिधि प्रो. विभा सिंह और सचिव डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि 1976 के पुराने कानून में बदलाव करने से पहले किसी भी विशेषज्ञ से परामर्श नहीं लिया गया है। उन्होंने राजभवन, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि यह प्रस्तावित कानून विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला है।
शिक्षकेतर कर्मचारियों की भी अपनी मांगें
केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि कॉलेज के गैर-शैक्षणिक कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं। शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के सचिव दुर्गेश कुमार सुमन और प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि वे अपनी दो सूत्री मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से एक घंटे का सांकेतिक धरना दे रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में जर्जर हो चुके स्टाफ क्वार्टरों की मरम्मत और सेवानिवृत्त कर्मियों को हटाने से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार और कॉलेज प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर जल्द कोई ठोस वार्ता नहीं की, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अनदेखी करना प्रशासनिक कार्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों पर संकट के बादल
शिक्षकों और कर्मचारियों के इस संयुक्त विरोध के कारण आने वाले दिनों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप होने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते सरकार और शिक्षक संघ के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और कॉलेज की दैनिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
वर्तमान स्थिति यह है कि शिक्षक संघ अपनी मांगों पर अडिग है और पूरे बिहार स्तर पर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों में असंतोष और गहराता जा रहा है। अब सबकी निगाहें 10 अगस्त के सामूहिक अवकाश और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!