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बिहार में सरकारी कामकाज में सुधार की पहल: 50 मिनट से लंबी बैठकों पर लगी रोक

बिहार सरकार ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत सरकारी बैठकों की अवधि और कार्यप्रणाली को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

10 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
बिहार में सरकारी कामकाज में सुधार की पहल: 50 मिनट से लंबी बैठकों पर लगी रोक
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अब नहीं चलेगा 'साहब मीटिंग में हैं' का बहाना

बिहार के सरकारी दफ्तरों और सचिवालयों में कामकाज की संस्कृति को बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 'गाइड ऑन कंडक्टिंग इफेक्टिव मीटिंग्स' जारी की है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में देरी को कम करना और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। अब सरकारी दफ्तरों में आम लोगों को यह रटा-रटाया जवाब नहीं मिलेगा कि अधिकारी किसी लंबी बैठक में व्यस्त हैं।

बैठकों के लिए नए सख्त नियम

नई गाइडलाइन के अनुसार, अब किसी भी सरकारी बैठक की अवधि 50 मिनट से अधिक नहीं होगी। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जिन कार्यों का निपटारा ईमेल या फोन कॉल के माध्यम से संभव है, उनके लिए बैठकें बुलाकर समय बर्बाद न किया जाए। बैठकों का आयोजन केवल तभी किया जाएगा जब वह अत्यंत आवश्यक हो। इसके अलावा, बिना किसी पूर्व निर्धारित एजेंडे के बैठक बुलाने पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

समय प्रबंधन को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब लंच ब्रेक या कार्यालय के समय की समाप्ति के ठीक पहले या बाद में बैठकें आयोजित नहीं की जा सकेंगी। इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। अपर मुख्य सचिव बी राजेंद्र ने पुष्टि की है कि प्रभावी मीटिंग गाइडलाइन सभी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है।

बैठक के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर भी लगाम लगाई गई है। अब अधिकारी बैठक के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे और न ही ईमेल चेक कर पाएंगे। बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ आना अनिवार्य होगा ताकि चर्चा को सार्थक और संक्षिप्त रखा जा सके।

जवाबदेही और कार्यप्रणाली में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत बैठक समाप्त होने के तीन दिनों के भीतर उसका 'मिनट्स' (कार्यवृत्त) जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें बैठक में लिए गए निर्णयों और निर्धारित एक्शन पॉइंट्स का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यह कदम भारत सरकार के कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन द्वारा तैयार की गई गाइडलाइन्स के अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य फाइलों के निपटारे की गति को तेज करना है।

इस नई कार्यप्रणाली का असर केवल सचिवालय तक ही सीमित नहीं रहेगा। सरकार इसे बिहार प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की योजना बना रही है। इससे भविष्य के अधिकारियों के कार्य व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों से न केवल प्रशासनिक सुस्ती दूर होगी, बल्कि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम काटने पड़ेंगे।

आने वाले समय में सचिवालय स्तर पर प्रशासनिक दक्षता को और अधिक बढ़ाने के लिए कुछ अन्य कड़े नियम भी लागू किए जा सकते हैं। सरकार का पूरा ध्यान अब फाइलों के पेंडेंसी को खत्म करने और विकास योजनाओं की रफ्तार को गति देने पर केंद्रित है, ताकि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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