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बिहार की आम जनमत पार्टी को 620 करोड़ का चंदा: बीजेपी नेत्री अनामिका पासवान ने पल्ला झाड़ा

बताया जा रहा है कि इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अनामिका पासवान के नाम का जिक्र है जो फिलहाल बीजेपी की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। पटना में उनसे जब बात की गई तो उन्होंने ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया..

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

5 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
बिहार की आम जनमत पार्टी को 620 करोड़ का चंदा: बीजेपी नेत्री अनामिका पासवान ने पल्ला झाड़ा
मूल स्रोत

620 करोड़ के चंदे से सुर्खियों में आई आम जनमत पार्टी

बिहार की एक छोटी और कम चर्चित राजनीतिक पार्टी 'आम जनमत पार्टी' इन दिनों भारी-भरकम चंदे को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान इस पार्टी को 620 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ, जो कि कांग्रेस जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी को मिले 281 करोड़ रुपये के चंदे से भी दोगुने से अधिक है। इतने बड़े पैमाने पर धन राशि प्राप्त करने के बावजूद, 2024 के लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने केवल एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा था।

बीजेपी नेत्री अनामिका पासवान का स्पष्टीकरण

पार्टी के दस्तावेजों में राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बीजेपी की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान का नाम दर्ज है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनामिका पासवान ने स्पष्ट किया है कि उनका इस पार्टी से अब कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एक वकील को पार्टी बंद करने के लिए अधिकृत किया था, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है कि उसके बाद पार्टी का संचालन किसके हाथों में चला गया।

अनामिका पासवान ने कहा कि उन्होंने पार्टी ट्रांसफर करने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया था और न ही वे उन लोगों को जानती हैं जो वर्तमान में पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि उनके नाम का इस्तेमाल अभी भी पार्टी अध्यक्ष के रूप में कैसे हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस्तीफा देने के लिए केवल एक सादे कागज पर हस्ताक्षर किए थे।

अचानक कैसे बढ़ा चंदे का ग्राफ?

पार्टी के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 2020 में पंजीकरण के बाद शुरुआती दो वर्षों में इसे केवल 20 हजार रुपये का चंदा मिला था। हालांकि, 2022-23 में यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 216 करोड़ रुपये हो गया और अगले ही वर्ष 2023-24 में यह 620 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पार्टी के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव का कहना है कि पार्टी अब सक्रिय नहीं है और सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि वर्तमान अध्यक्ष बताए जा रहे गौरव मिश्रा ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस भारी चंदे के पीछे एक संगठित नेटवर्क का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का सिंडिकेट टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों और आईटी पेशेवरों की मदद के लिए इस पार्टी का इस्तेमाल कर रहा था। कमीशन काटकर बाकी रकम हवाला या नकद के जरिए वापस लौटा दी जाती थी, जिससे टैक्स शून्य किया जा सके।

पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त दलों की भूमिका

भारत में हजारों ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं जो चुनाव आयोग में पंजीकृत तो हैं लेकिन उन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है (RUPP)। वर्ष 2023-24 के दौरान इन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को कुल 1700 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह आंकड़ा भाजपा को छोड़कर अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों जैसे कांग्रेस, एनसीपी और आम आदमी पार्टी को मिले कुल चंदे से भी अधिक है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता और फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इतनी बड़ी राशि का स्रोत क्या था और क्या इन पार्टियों का इस्तेमाल केवल काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा था।

फिलहाल, आम जनमत पार्टी के अस्तित्व और उसके वित्तीय लेन-देन की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अनामिका पासवान के दावों और पार्टी पदाधिकारियों की चुप्पी ने इस मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है, जिससे आने वाले समय में कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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