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भोपाल में किसानों का उग्र प्रदर्शन: अर्धनग्न होकर जताया विरोध, बैरिकेड तोड़े, सीएम हाउस मार्ग पर भारी सुरक्षा

भोपाल में मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम और MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर किसानों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध जताया, बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सड़क पर सद्बुद्धि यज्ञ किया। पुलिस ने सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे किसानों को वीर सावरकर सेतु पर रोक दिया, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाते हुए कई रास्ते बंद कर दिए और आसपास के स्कूलों में अवकाश घोषित किया।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

29 जुलाई 2026 अपडेट 29 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
भोपाल में किसानों का उग्र प्रदर्शन: अर्धनग्न होकर जताया विरोध, बैरिकेड तोड़े, सीएम हाउस मार्ग पर भारी सुरक्षा

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन और अधिक उग्र रूप में दिखाई दिया। मूंग खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, फसलों के उचित दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी किसानों ने सीएम हाउस की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी।

वीर सावरकर सेतु पर रोका गया मार्च

किसानों का जत्था एम्प्री क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए वीर सावरकर सेतु तक पहुंचा, जहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार लेयर लगाकर बैरिकेडिंग की थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें। कुछ किसान बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, लेकिन पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा। इसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

अर्धनग्न होकर जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि बढ़ती लागत, महंगाई और फसलों के कम दाम ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मूंग खरीदी की प्रक्रिया में अव्यवस्था है और ई-टोकन सिस्टम किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

सड़क पर ही बना भोजन, रातभर डटे रहे किसान

कई किसान रातभर प्रदर्शन स्थल पर ही डटे रहे। सुबह कुछ किसान आराम करते दिखाई दिए, जबकि अन्य ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन की व्यवस्था की। आंदोलन स्थल पर सामूहिक भोजन और विश्राम की तस्वीरें भी सामने आईं, जो किसानों के लंबे संघर्ष की ओर संकेत करती हैं।

सद्बुद्धि यज्ञ और हवन

किसानों ने सरकार को “सद्बुद्धि” देने की कामना करते हुए सड़क पर हवन और यज्ञ भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन लगातार अनदेखी किए जाने से उनमें नाराजगी बढ़ रही है।

युवाओं का भी मिला समर्थन

इस आंदोलन में युवाओं, विशेषकर Gen-Z वर्ग के कुछ लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली। किसानों के समर्थन में पहुंचे युवाओं ने कहा कि कृषि संकट केवल किसानों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और भविष्य की अर्थव्यवस्था का मुद्दा है।

ट्रैफिक प्रभावित, स्कूलों में अवकाश

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने नर्मदापुरम रोड, होशंगाबाद रोड और आसपास के कई मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। इससे शहर में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को लंबा जाम झेलना पड़ा। स्थिति को देखते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर संवाद के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है। इस समिति में शामिल मंत्री किसानों से बातचीत करेंगे और उनकी मांगों पर विचार करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के सकारात्मक सुझावों के साथ है, लेकिन आम जनता को होने वाली असुविधा का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?

  • मूंग खरीदी की प्रभावी व्यवस्था
  • ई-टोकन सिस्टम में सुधार
  • MSP की कानूनी गारंटी
  • फसलों का लाभकारी मूल्य
  • कृषि लागत के अनुरूप समर्थन मूल्य

आगे क्या?

फिलहाल आंदोलन जारी है और किसानों ने संकेत दिए हैं कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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