भोपाल: फर्जी IAS बनकर ठगी करने वाली तृप्ति सिंह पर एक और केस, 39 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी
भोपाल के खुद को ट्रेनी IAS अधिकारी और मध्यप्रदेश पर्यटन (MPT) में एडिशनल डायरेक्टर बताने वाली तृप्ति सिंह के खिलाफ बागसेवनियां थाने में एक और धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। इस बार उस पर बालाघाट निवासी युवक से MPT की होटल-रिसोर्ट संपत्तियां लीज पर दिलाने और नौकरी लगवाने का झांसा देकर 39.17 लाख रुपए लेने का आरोप है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

भोपाल में खुद को ट्रेनी आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग (MPT) में एडिशनल डायरेक्टर बताने वाली तृप्ति सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बागसेवनियां थाना पुलिस ने तृप्ति सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और नया मामला दर्ज किया है। इस बार आरोप है कि उसने बालाघाट के एक युवक को सरकारी संपत्तियां लीज पर दिलाने और नौकरी लगवाने का झांसा देकर लाखों रुपये की चपत लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चिचोली निवासी रोहित लिल्हारे ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। रोहित का आरोप है कि तृप्ति सिंह ने खुद को एक प्रभावशाली सरकारी अधिकारी बताते हुए उसका भरोसा जीता। इस काम में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह और प्रखर सिंह ने भी उसका साथ दिया। उन्होंने रोहित को यकीन दिलाया कि तृप्ति का पद काफी ऊंचा है और वह पर्यटन विभाग की संपत्तियों को लीज पर दिलाने में सक्षम है।
आरोप है कि इस झांसे में आकर रोहित ने होटल और रिसोर्ट की लीज के नाम पर 35.30 लाख रुपये और नौकरी लगवाने के नाम पर 3.87 लाख रुपये दिए। इस तरह कुल 39.17 लाख रुपये की राशि आरोपियों को दी गई। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो लीज का काम हुआ और न ही नौकरी लगी।
रकम वापस मांगने पर टालमटोल
जब रोहित को ठगी का अहसास हुआ, तो उसने अपनी रकम वापस मांगी। आरोपियों ने उसे केवल 1 लाख रुपये वापस किए और बाकी की बड़ी राशि दबा ली। इसके बाद रोहित ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तृप्ति सिंह, उसके भाई सुधांशु, प्रखर और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया। पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि तृप्ति ने खुद को आईएएस साबित करने के लिए किन दस्तावेजों का सहारा लिया था और उसके बैंक खातों में यह रकम किस तरह से ट्रांसफर की गई।
अन्य पीड़ितों की तलाश में पुलिस
बागसेवनियां पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 549/2026 दर्ज किया है। जांच अधिकारी का कहना है कि तृप्ति सिंह ने जिस तरह से अपनी पहचान का इस्तेमाल किया, उससे यह स्पष्ट है कि उसने अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया होगा। पुलिस अब उन अन्य पीड़ितों की तलाश कर रही है जो इस गिरोह का शिकार हुए हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपियों के बैंक लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी की कुल राशि और पीड़ितों की संख्या में और भी इजाफा हो सकता है। आरोपियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस हर पहलू से साक्ष्य जुटाने में लगी है।
यह मामला सामने आने के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। फर्जी आईएएस बनकर सरकारी तंत्र के नाम पर लोगों को ठगने की यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी और के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी हुई है, तो वे तुरंत थाने में आकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!