भोपाल-देवास मार्ग पर अब बिना रुके कटेगा टोल, 100 की रफ्तार में फर्राटा भर सकेंगे वाहन
भोपाल देवास मार्ग पर टोल वसूली व्यवस्था की आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर बैरियर लेस टोलिंग की शुरुआत की गई है। यहां से गुजरने वाला वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते हुए भी टोल प्लाजा को पार कर सकेगा।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मध्य प्रदेश के भोपाल-देवास मार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने इस मार्ग पर बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था का परीक्षण शुरू कर दिया है। इस नई तकनीक के लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति धीमी करने की आवश्यकता नहीं होगी। वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल प्लाजा को पार कर सकेंगे।
फंदा टोल से हुई शुरुआत
मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) ने फिलहाल इस आधुनिक व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट फंदा टोल बैरियर की एक लेन में शुरू किया है। वर्तमान में टोल प्लाजा पर लगे बूम बैरियर के कारण वाहनों को अपनी गति कम करनी पड़ती है, जिससे समय की बर्बादी होती है और बार-बार ब्रेक लगाने के कारण ईंधन की खपत भी अधिक होती है। नई व्यवस्था में बूम बैरियर को हटा दिया जाएगा, जिससे यातायात निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
इस प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता न के बराबर होगी। टोल वसूली के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती की जरूरत नहीं रहेगी। वाहन जैसे ही टोल लेन से गुजरेगा, वहां लगे सेंसर और उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे वाहन की पहचान और उसकी श्रेणी का निर्धारण कर लेंगे। इसके बाद फास्टैग के जरिए निर्धारित टोल शुल्क स्वतः ही खाते से कट जाएगा।
तकनीकी प्रक्रिया और ई-चालान का प्रावधान
बैरियर-लेस टोलिंग के लिए लेन में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर, स्वचालित नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे और लेन कंट्रोलर सिस्टम लगाए गए हैं। यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या कोई तकनीकी त्रुटि आती है, तो प्रणाली स्वतः ही ई-चालान जनरेट कर देगी। वाहन मालिक को तीन दिन के भीतर टोल राशि का भुगतान करना होगा, अन्यथा नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
एमपीआरडीसी के अनुसार, यदि फंदा टोल पर चल रहा यह परीक्षण सफल रहता है, तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के सभी तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। यह नवाचार न केवल यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से भी मुक्ति दिलाएगा।
आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने हाल ही में सीएसआईआर-एम्प्री का दौरा करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार राज्य में मजबूत और टिकाऊ अधोसंरचना के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बैरियर-लेस टोलिंग का यह मॉडल यूरोप और जर्मनी जैसे विकसित देशों में पहले से ही काफी सफल रहा है। भारत के कुछ चुनिंदा एक्सप्रेसवे के बाद मध्य प्रदेश में इस तकनीक का उपयोग एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस नई व्यवस्था से न केवल परिचालन लागत में कमी आएगी, बल्कि टोल वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य की अन्य प्रमुख सड़कों पर भी इसी तरह की तकनीक का विस्तार किया जाए ताकि सड़क यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!