भोपाल के बड़ा तालाब में अतिक्रमण का बड़ा खुलासा: सर्वे में डूबी मिलीं मुनारें, विधायक का फार्म हाउस भी दायरे में
सर्वे के दौरान करीब 9 ऐसी मुनारें मौके पर मिलीं, जो पूरी तरह पानी में डूबी हुई थीं। सर्वे टीम के अनुसार, इस दौरान सबसे प्रमुख मामला बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस से जुड़ा सामने आया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर एनजीटी का सख्त रुख
भोपाल के ऐतिहासिक बड़ा तालाब (भोजताल) के संरक्षण और उसकी सीमाओं को लेकर एनजीटी के निर्देश पर चल रहा सर्वे तीसरे दिन भी जारी रहा। तालाब का जलस्तर फुल टैंक लेवल (FTL) तक पहुंचने के बाद प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान तालाब के वेटलैंड और एफटीएल क्षेत्र में गंभीर अनियमितताएं और अतिक्रमण के कई मामले सामने आए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से चिंताजनक हैं।
सर्वे टीम को मौके पर ऐसी 9 मुनारें (सीमा स्तंभ) मिलीं, जो पूरी तरह से पानी में डूबी हुई थीं। कई स्थानों पर तो पानी की सीमा मुनारों से 5 से 10 फीट आगे तक पहुंच गई है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि तालाब की वास्तविक सीमा और वर्तमान जलभराव के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसके लिए अब वैज्ञानिक और तकनीकी सत्यापन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विधायक के फार्म हाउस और बड़े परिसरों पर सवाल
सर्वे के दौरान सबसे प्रमुख मामला बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस से जुड़ा सामने आया है। टीम ने पाया कि फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए तालाब के वेटलैंड क्षेत्र के अंदर एक सड़क का निर्माण किया गया है। यह सड़क एफटीएल क्षेत्र में स्थित दो मुनारों के बीच से होकर गुजरती है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है। इसके अलावा, ईशा अंबानी से जुड़े परिसर में भी तालाब के एफटीएल क्षेत्र के भीतर लगभग 6 फीट तक मलबा भरे जाने की जानकारी मिली है।
अतिक्रमण की यह सूची यहीं समाप्त नहीं होती। सर्वे में राकेश शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा तालाब क्षेत्र में मकान बनाने, सीआई ऑटोमोबाइल का यार्ड एफटीएल क्षेत्र से लगा होने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक कर्मचारी द्वारा तालाब के पास रेस्टोरेंट बनाने जैसे मामले भी प्रकाश में आए हैं।
व्यापक स्तर पर चल रही ग्राउंड ट्रुथिंग
सर्वे टीम ने केवल एक स्थान तक सीमित न रहकर भौंरी, कोलूखेड़ी, खजूरी सड़क और बैरागढ़ सहित कई क्षेत्रों में जाकर ग्राउंड ट्रुथिंग की। इन स्थानों में भौरी सीपीए प्लांटेशन, द आर्क, वायु होटल, यश ढाबा, कर्व रेस्टोरेंट, खजूरी सड़क की ईंट फैक्ट्री और ग्रीन क्लासिक रिजॉर्ट जैसे कई चर्चित स्थल शामिल हैं। इन सभी जगहों पर तालाब की सीमा और निर्माण कार्यों का मिलान राजस्व रिकॉर्ड से किया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एनजीटी द्वारा नियुक्त विशेष सदस्य डॉ. सुभाष सी. पांडेय, सीपीसीबी, एमपीपीसीबी के अधिकारी और स्थानीय पटवारी मौजूद रहे। याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की उपस्थिति में यह सर्वे तालाब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे की राह और तकनीकी सत्यापन
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मुनारों को आधार मानकर तालाब की सीमा तय करना अब पर्याप्त नहीं है। भविष्य में तालाब को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक मुनारे की सटीक लोकेशन, ऊंचाई और वर्तमान जलभराव की स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य है। सर्वे टीम अब इन सभी साक्ष्यों को राजस्व और तकनीकी अभिलेखों के साथ मिलाएगी ताकि वास्तविक अतिक्रमणकारियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
तालाब के वेटलैंड क्षेत्र में सड़क निर्माण, मलबा भराव और अन्य अवैध गतिविधियों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। एनजीटी की यह कार्रवाई आने वाले समय में भोपाल के जल स्रोतों को बचाने के लिए एक नजीर बन सकती है, बशर्ते इन रिपोर्टों के आधार पर सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!