भोजपुर एनकाउंटर: मां ने कोर्ट में बयां की आपबीती, पुलिस पर लगाए सुनियोजित हत्या के गंभीर आरोप
भोजपुर के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आशा देवी, भरत के भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी का न्यायिक बयान दर्ज किया गया। परिजन ने अदालत के समक्ष पुलिस की कार्रवाई को सुनियोजित बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अदालत में दर्ज हुआ परिजनों का बयान
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब कानूनी प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। आरा सिविल कोर्ट में भरत की मां आशा देवी, भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी ने धारा 164 के तहत अपना न्यायिक बयान दर्ज कराया। परिजनों ने पुलिस की इस कार्रवाई को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है और घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
आशा देवी ने अदालत को बताया कि उनका बेटा भरत बार-बार पुलिस से गुहार लगा रहा था कि वह किसी से विवाद नहीं चाहता और मामले को सुलझाने के लिए एसपी-डीएम को बुलाया जाए। मां का आरोप है कि पुलिस के कहने पर भरत ने अपना हथियार भी फेंक दिया था, इसके बावजूद उसे जिंदा नहीं छोड़ा गया। परिजनों के अनुसार, उसे पहले तीन और फिर रास्ते में दो गोलियां मारी गईं।
पुलिस पर साजिश और अपमानजनक व्यवहार का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि 16 जून से ही शाहपुर पुलिस उनके घर के बाहर डेरा डाले हुए थी। मां के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश कुमार मालाकार लगातार उनके परिवार के साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि 17 जून की सुबह जब भरत विस्थापितों की समस्या के लिए घर से बाहर निकला, तो पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
आशा देवी ने यह भी दावा किया कि भरत उस समय फेसबुक लाइव पर था और अपनी मांगें रख रहा था। इसी दौरान डीएसपी ने उसे हथियार फेंकने के लिए कहा, जिसे उसने मान लिया। आरोप है कि हथियार फेंकने के बाद उसे कंधे पर हाथ रखकर ले जाया गया और फिर गोलियां मार दी गईं। परिजनों का कहना है कि यदि उसे समय पर अस्पताल ले जाया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
भरत की भाभी सुमन देवी ने भी पुलिस पर पूर्व नियोजित एनकाउंटर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिवार को पहले ही धमकी दी गई थी कि 12 घंटे के भीतर भरत का एनकाउंटर कर दिया जाएगा। परिवार ने बिहार पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए न्याय की मांग की है और दोषियों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
न्यायिक जांच आयोग की सक्रियता
दूसरी ओर, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने आरा पहुंचकर कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने आयोग के कार्यालय का निरीक्षण किया और अधिकारियों से प्रारंभिक जानकारी ली। न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य घटना की पृष्ठभूमि, पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता और परिस्थितियों की गहन जांच करना है।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने बताया कि आयोग पहले ही बिलौटी गांव जाकर परिजनों से मिल चुका है। अब प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सके। घटना के समय वहां मौजूद सात बाढ़ विस्थापितों और अन्य गवाहों के बयान भी इस मामले में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें इस न्यायिक जांच पर टिकी हैं। परिजनों के बयानों और आयोग की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एनकाउंटर के पीछे की सच्चाई क्या है। परिवार ने अब अनशन के माध्यम से अपनी लड़ाई को और तेज करने का निर्णय लिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!