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भिवानी में सफाई और अग्निशमन कर्मियों का प्रदर्शन, तीन दिन का अल्टीमेटम

भिवानी में वीरवार को नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों व अग्निशमन के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की। साथ ही सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि सरकार द्वारा मानी गई मांगों को पूरा किया जाए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
भिवानी में सफाई और अग्निशमन कर्मियों का प्रदर्शन, तीन दिन का अल्टीमेटम
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मांगें पूरी न होने पर भिवानी में कर्मचारियों का आक्रोश

भिवानी नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों और अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया। शहर में काम बंद कर सड़कों पर उतरे इन कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द अमल नहीं हुआ, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उन्हें तीन दिन का समय दिया है। यदि इस अवधि के भीतर उनकी मांगों को पूरा करने के संबंध में आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन में नगर पालिका कर्मचारी संघ और फायरब्रिगेड कर्मचारी संघ के पदाधिकारी प्रमुखता से शामिल रहे।

समझौते के बावजूद नहीं जारी हुआ पत्र

कर्मचारी नेताओं ने बताया कि 14 मई को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच एक उच्च स्तरीय समझौता हुआ था। उस समय सरकार ने कर्मचारियों की 22 में से 17 मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था। सरकार ने उस दौरान इन मांगों को लागू करने के लिए डेढ़ महीने का समय मांगा था, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं किए गए हैं।

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए वादों से मुकरने के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष है। उन्होंने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा है, जिसके चलते उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में पे-रोल पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन को नियमित करना शामिल है। इसके अलावा, ठेके पर काम कर रहे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाकर उन्हें पक्का करने की मांग की गई है। जब तक कर्मचारी नियमित नहीं होते, तब तक उन्हें 30 हजार रुपये मासिक वेतन देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

इसके अतिरिक्त, एक्सग्रेसिया पॉलिसी को सरल बनाने और उसमें कच्चे कर्मचारियों को भी शामिल करने की मांग की गई है। छंटनी का शिकार हुए कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने और रोहतक से हटाए गए डोर-टू-डोर कर्मचारियों को बहाल करने की मांग भी इस आंदोलन का हिस्सा है। यूनियन नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार लिखित में आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

इस हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। यदि तीन दिन के भीतर सरकार और कर्मचारियों के बीच कोई नया समझौता नहीं होता है, तो भिवानी की सड़कों पर कचरे के ढेर जमा हो सकते हैं और अग्निशमन सेवाओं पर भी संकट आ सकता है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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