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भागलपुर: राहत शिविर में गैस खत्म होने से 400 लोग भूखे, घंटों बिलखते रहे बच्चे

भागलपुर में बाढ़ के बीच राहत शिविरों में सरकारी इंतजामों की कमी दिखी। गोराडीह प्रखंड की उस्तूपंचायत के श्रीरामपुर बी बस्ती में एक राहत शिविर में राशन तो था, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर खत्म हो गया।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

15 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
भागलपुर: राहत शिविर में गैस खत्म होने से 400 लोग भूखे, घंटों बिलखते रहे बच्चे
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राहत शिविर में अव्यवस्था का आलम

भागलपुर जिले में बाढ़ का कहर जारी है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इस बीच गोराडीह प्रखंड की उस्तूपंचायत के श्रीरामपुर बी बस्ती में बने एक राहत शिविर से सरकारी इंतजामों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शिविर में राशन की उपलब्धता तो थी, लेकिन रसोई गैस सिलेंडर खत्म होने के कारण करीब 400 बाढ़ पीड़ितों को सुबह से दोपहर तक भूखा रहना पड़ा।

बाढ़ के पानी से घिरे इन लोगों को उम्मीद थी कि शिविर में उन्हें समय पर भोजन मिल जाएगा, लेकिन गैस की कमी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। शिविर में मौजूद चूल्हे ठंडे पड़े थे और रसोई में खाना बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी। इस स्थिति के कारण शिविर में मौजूद परिवारों, विशेषकर छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

निजी प्रयासों से मिली राहत

स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही बच्चे भूख के कारण बिलख रहे थे और चार घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जब स्थिति गंभीर होने लगी, तो मामले की सूचना जिला परिषद प्रत्याशी छोटू यादव को मिली। उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपने निजी कोष से दो गैस सिलेंडर का इंतजाम किया और उन्हें शिविर तक पहुंचाया।

सिलेंडर पहुंचने के बाद ही शिविर की रसोई में खाना बनाने का काम शुरू हो सका। छोटू यादव ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में जनता को भोजन के लिए तरसना पड़े, यह बेहद दुखद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक लोग भूखे हैं, तब तक वे चैन से नहीं बैठ सकते और जरूरतमंदों की मदद करना उनकी प्राथमिकता है।

बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा

राहत शिविर में भोजन की समस्या सुलझाने के बाद जिला परिषद प्रत्याशी ने गोराडीह प्रखंड के अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों का भी दौरा किया। उन्होंने बताया कि हालांकि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन पानी घटने के साथ ही अब नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। जलजमाव वाले क्षेत्रों में गंदगी और बदबू के कारण संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है।

लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण गांवों में स्वच्छता की स्थिति काफी दयनीय हो गई है। स्थानीय लोगों को अब बीमारियों के फैलने का डर सता रहा है। इन हालातों को देखते हुए प्रशासन से मांग की गई है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से मेडिकल कैंप लगाए जाएं और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन से स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग

बाढ़ पीड़ितों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि बाढ़ के दौरान भोजन और सुरक्षित आश्रय के साथ-साथ अब स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासन को पहले से ही स्वास्थ्यकर्मियों की टीम तैयार रखनी चाहिए थी ताकि पानी उतरने के बाद बीमारियों पर काबू पाया जा सके। अब देखना यह है कि प्रशासन इन प्रभावित गांवों में कब तक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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