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बरेली दंगा मामला: मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ अदालती ट्रायल शुरू, जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी

सितंबर को बरेली में हुए दंगे के मुख्य आरोपी आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा इन दिनों फतेहगढ़ जेल में बंद हैं। अब कोर्ट में तौकीर रजा का ट्रायल शुरू हो गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

21 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
बरेली दंगा मामला: मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ अदालती ट्रायल शुरू, जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी
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कानूनी शिकंजा: मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ ट्रायल की शुरुआत

बरेली में पिछले साल 26 सितंबर को हुए दंगों के मुख्य आरोपी और आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में अब औपचारिक रूप से अदालती ट्रायल शुरू हो चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें फतेहगढ़ जेल में रखा गया है, जहां से वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हो रहे हैं।

मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में इस मामले की सुनवाई निर्धारित की गई है। इससे पहले सोमवार को स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट संतोष कुमार यादव की अदालत में आरोप तय किए जाने के बाद पहली पेशी संपन्न हुई। इस दौरान तौकीर रजा के साथ अन्य 15 आरोपियों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के समक्ष लाया गया।

जमानत की तमाम कोशिशें रहीं नाकाम

मौलाना तौकीर रजा ने अपनी रिहाई के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिली। बरेली की स्थानीय अदालत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सर्वोच्च न्यायालय ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत न मिलने के बाद अब नियमित ट्रायल ही एकमात्र रास्ता बचा है।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनके पास तौकीर रजा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। सीओ सिटी आशुतोष शिवम के अनुसार, सभी 12 मामलों में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। पुलिस का प्रयास है कि इन मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए ताकि जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

क्या था 26 सितंबर का विवाद?

यह पूरा घटनाक्रम कानपुर में हुए एक पोस्टर विवाद के बाद शुरू हुआ था। उस दौरान बरेली में जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, फिर भी भारी संख्या में भीड़ इस्लामिया ग्राउंड की ओर बढ़ने लगी थी।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति बेकाबू हो गई और कोतवाली, बारादरी, किला, प्रेमनगर और कैंट थाना क्षेत्रों में हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने आरोप लगाया है कि भीड़ ने न केवल पथराव किया, बल्कि फायरिंग और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया। सरकारी कार्यों में बाधा डालने के आरोप में कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

सोमवार की पेशी के दौरान अभियोजन पक्ष की गवाही शुरू नहीं हो सकी, लेकिन आने वाली सुनवाइयों में गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि वे अदालत में अपना पक्ष पूरी मजबूती से रखेंगे। तौकीर रजा की फतेहगढ़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।

अब सबकी निगाहें सीजेएम कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। प्रशासन ने शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। ट्रायल की गति और साक्ष्यों की मजबूती ही तय करेगी कि इस मामले में आगे का कानूनी रुख क्या होगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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