ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

बालाघाट स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल: 31 बच्चों की मौत के दावों के बीच नए सीएमएचओ की नियुक्ति

बिगड़ते हालातों के बीच महज चार दिनों के भीतर दो बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बदल दिए गए हैं। 2 सितंबर को सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप को हटाकर तत्कालीन सीएमएचओ को प्रभार सौंपा गया था।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

7 सितंबर 2026 अपडेट 7 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
बालाघाट स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल: 31 बच्चों की मौत के दावों के बीच नए सीएमएचओ की नियुक्ति
मूल स्रोत

चार दिनों में दूसरी बार बदला सीएमएचओ

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर मचे घमासान के बीच प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों और बिगड़ती स्वास्थ्य स्थितियों के मद्देनजर महज चार दिनों के भीतर दूसरी बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को बदल दिया गया है। रविवार शाम जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शत्रुघन दाहिया को बालाघाट का नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है।

इससे पहले 2 सितंबर को डॉ. परेश उपलप को सीएमएचओ के पद से हटाकर प्रभार अन्य अधिकारी को सौंपा गया था। हालांकि, स्थिति में सुधार न होने और बढ़ते दबाव के चलते प्रशासन ने अब एक विशेषज्ञ डॉक्टर को कमान सौंपी है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब जिले के बैहर और परसवाड़ा अंचल में फैली बीमारी के कारण स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मौतों के आंकड़ों पर छिड़ा सियासी संग्राम

जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर तक करीब 31 आदिवासी बच्चों की जान जा चुकी है। वहीं, दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप का दावा है कि मौतों का आंकड़ा 8 से 12 के बीच ही है। आंकड़ों के इस भारी अंतर ने विपक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सरकार के खिलाफ लामबंद कर दिया है।

विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर मौतों के वास्तविक आंकड़ों को छिपाने का प्रयास कर रहा है ताकि अपनी विफलता को ढका जा सके। क्षेत्रीय विधायक संजय उईके ने भी सरकार पर आदिवासी बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। इस गंभीर मुद्दे ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप और प्रभावी समाधान की मांग की है।

अस्पतालों में दबाव और हाईकोर्ट में याचिका

बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बालाघाट जिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में बिस्तरों की क्षमता 50 से बढ़ाकर 138 कर दी है। इसके अलावा बिठली, बैहर और लांजी के स्वास्थ्य केंद्रों में भी प्रभावित बच्चों को भर्ती कर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि संसाधनों की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

यह पूरा मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के सबूत पेश करने की तैयारी की है। आगामी सुनवाई में इस मामले पर कोर्ट का रुख काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से जुड़ा है।

कुपोषण और दूषित पेयजल बनी बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि इस त्रासदी के पीछे केवल चिकित्सा सेवाओं की कमी ही एकमात्र कारण नहीं है। वनांचल क्षेत्रों में व्याप्त भीषण कुपोषण और दूषित पेयजल की समस्या ने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। जब तक इन बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक केवल सीएमएचओ बदलने से स्थिति में सुधार की उम्मीद करना कठिन है।

अब देखना यह होगा कि नए सीएमएचओ डॉ. शत्रुघन दाहिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग किस तरह से इस संकट का सामना करता है। प्रशासन के सामने न केवल मौतों के आंकड़ों को नियंत्रित करने की चुनौती है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण और पोषण अभियान को भी युद्ध स्तर पर चलाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें