विश्व आदिवासी दिवस: अरविंद केजरीवाल का सरकारों पर हमला, कहा- 75 सालों से आदिवासियों के संसाधनों पर डाका
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश भर के आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देते हुए केंद्र और विपक्षी दलों की सरकारों पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आजादी के 75 सालों में सबसे ज्यादा अन्याय और शोषण आदिवासी समाज के साथ ही हुआ है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश के आदिवासी समुदायों को बधाई दी है। इस मौके पर उन्होंने केंद्र और विभिन्न राज्यों में रही सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए आदिवासी समाज के शोषण का मुद्दा उठाया। केजरीवाल ने दावा किया कि आजादी के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आदिवासी समाज को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया है।
संसाधनों के दोहन पर गंभीर आरोप
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 75 वर्षों में देश के अन्य वर्गों ने विकास की मुख्यधारा में जगह बनाई है, लेकिन आदिवासी समाज को जानबूझकर हाशिए पर धकेला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समाज का नैसर्गिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक भ्रष्टाचार और मिलीभगत के कारण इन संसाधनों को उनसे छीनकर बड़ी निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के साथ हुआ सबसे बड़ा अन्याय करार दिया।
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासियों के पारंपरिक संसाधनों का जिस तरह से दोहन किया गया है, उसने उनकी जीवनशैली और संस्कृति को गहरे संकट में डाल दिया है। केजरीवाल के अनुसार, सत्ता में बैठे लोगों ने अपनी सुविधा के लिए इन संसाधनों का निजीकरण किया है, जिससे आदिवासी समाज अपनी ही जमीन पर बेगाने हो गए हैं।
पेसा कानून के क्रियान्वयन पर सवाल
आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए बने 'पेसा' (PESA) कानून का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने सरकारों की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कागजों पर तो यह कानून मौजूद है, लेकिन धरातल पर इसे कभी भी पूरी ईमानदारी से लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें ग्राम सभाओं की सहमति और आदिवासी समाज से परामर्श किए बिना ही उनके क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ले लेती हैं, जो कि कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि जब तक ग्राम सभाओं को वास्तविक शक्तियां नहीं दी जाएंगी और उनके निर्णयों का सम्मान नहीं होगा, तब तक आदिवासी समाज का उत्थान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
चैतर वसावा का मुद्दा और संघर्ष की हुंकार
इस अवसर पर अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के विधायक चैतर वसावा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चैतर वसावा आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इसी संघर्ष के कारण उन्हें बार-बार जेल भेजा गया है। उन्होंने जनता से चैतर वसावा की जल्द रिहाई के लिए प्रार्थना करने की अपील की और कहा कि आम आदमी पार्टी आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से जारी रखेगी।
केजरीवाल ने अपने संबोधन का समापन पारंपरिक आदिवासी अभिवादन 'जय जोहार' के साथ किया। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे आदिवासी समाज के संघर्षों को समझें और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।

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मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!