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अंकित बालियान हत्याकांड: सोनीपत के शाहपुर गांव में दहशत का माहौल, 20 युवक अंडरग्राउंड

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान मर्डर केस की जांच गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के गांव शाहपुर तक भी पहुंच गई है। भोलू शाहपुरिया ने ही सोशल मीडिया पोस्ट डालकर इस मर्डर की जिम्मेदारी ली थी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
अंकित बालियान हत्याकांड: सोनीपत के शाहपुर गांव में दहशत का माहौल, 20 युवक अंडरग्राउंड
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शाहपुर गांव में पुलिस की लगातार दबिश से ग्रामीणों में खौफ

हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के बाद से सोनीपत जिले का शाहपुर गांव गहरी दहशत में है। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया द्वारा सोशल मीडिया पर लिए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। पुलिस की लगातार छापेमारी के कारण गांव के सामान्य जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है।

ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस की बार-बार हो रही रेड और सिविल ड्रेस में संदिग्ध लोगों की आवाजाही से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। डर का आलम यह है कि गांव के करीब 20 युवा अपना काम-काज और नौकरी छोड़कर अंडरग्राउंड हो गए हैं। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहता है और रात के समय पुलिस की गाड़ियों व ड्रोन की निगरानी ने लोगों की नींद उड़ा दी है।

पंचायत में ग्रामीणों ने जताई चिंता

मंगलवार को गांव में एक पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने अंकित बालियान की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया। पंचायत में यह मांग उठाई गई कि पुलिस अपनी जांच जारी रखे, लेकिन बेगुनाह युवाओं को बेवजह परेशान न किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, बशर्ते पुलिस वर्दी में आए और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर कार्रवाई करे।

स्थानीय निवासी सुमेर और जयकिशन शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने 45-60 वर्षों के जीवन में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा। बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और रात में ड्रोन उड़ने से ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। महिलाएं और बच्चे भी अब घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।

भोलू शाहपुरिया के परिवार का पक्ष

गैंगस्टर भोलू शाहपुरिया की मां राजपति ने बताया कि उनका बेटा चार साल से गांव नहीं आया है और परिवार का उससे अब कोई नाता नहीं है। उन्होंने कहा कि भोलू के पिता के निधन के समय भी पुलिस की मौजूदगी के कारण वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका था। परिवार के अन्य सदस्य भी पुलिस के डर से घर छोड़ने को मजबूर हैं।

भोलू के चाचा रमेश ने बताया कि अंकित हत्याकांड में उनके बेटे चिराग का नाम भी लिया जा रहा है, जबकि वह पिछले तीन वर्षों से कनाडा में पढ़ाई कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस की इस कार्रवाई से परेशान होकर कोई युवा गलत कदम न उठा ले।

गांव में कैद जैसा महसूस कर रहे लोग

ग्रामीण अजीत सिंह ने नम आंखों से कहा कि वे अपने ही गांव में कैद होकर रह गए हैं। दुकानदारों और नौकरीपेशा युवाओं को भी पूछताछ के नाम पर रोका जा रहा है। पंचायत ने स्पष्ट किया कि वे अंकित के परिवार के साथ खड़े हैं और दोषियों को पकड़वाने में पुलिस की मदद करेंगे, लेकिन सामूहिक कार्रवाई के बजाय केवल अपराधियों तक सीमित रहने का आग्रह किया है।

फिलहाल, शाहपुर गांव में स्थिति सामान्य होने के बजाय और अधिक तनावपूर्ण होती जा रही है। पुलिस की निगरानी और ग्रामीणों के बीच बढ़ता अविश्वास प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। गांव के लोग अब केवल यही चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो और निर्दोषों को प्रताड़ना से मुक्ति मिले।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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