अलवर पार्षद अपहरण मामला: पंचकूला रिसॉर्ट में पुलिस की छापेमारी, बीजेपी समर्थित पार्षदों की बाड़ेबंदी का खुलासा
राजस्थान के अलवर जिले की नगर परिषदनिगम राजनीति से जुड़ा एक हाई-प्रोफाइल ड्रामा हरियाणा के पंचकूला स्थित रिसॉर्ट में सामने आया है। वार्ड नंबर 10 से निर्दलीय चुनाव जीते पार्षद योगेश शर्मा के परिजनों ने कांग्रेस पर उनके परिवार के किडनैपिंग का आरोप लगाया था।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

अलवर से पंचकूला तक पहुंचा सियासी ड्रामा
राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ नगरपालिका से जुड़े एक पार्षद के लापता होने और उनके अपहरण के आरोपों ने हरियाणा के पंचकूला में एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। वार्ड नंबर 10 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पार्षद योगेश शर्मा के परिजनों ने कांग्रेस पर अपहरण का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में जब पुलिस ने पंचकूला के एक रिसॉर्ट में छापेमारी की, तो स्थिति पूरी तरह से उलट गई।
शिकायतकर्ता राकेश शर्मा ने आरोप लगाया था कि उनके भाई योगेश शर्मा, उनकी पत्नी और दो बच्चों को पिछले पांच दिनों से बंधक बनाकर रखा गया है। परिजनों का दावा था कि योगेश का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है और उन्हें गुमराह कर पंचकूला के एक रिसॉर्ट में ले जाया गया है। इस शिकायत के बाद पंचकूला पुलिस हरकत में आई और तुरंत जांच शुरू की।
पुलिस रेड में सामने आई बाड़ेबंदी की सच्चाई
जब पुलिस टीम शिकायतकर्ता के साथ पंचकूला के शिवजोत रिसॉर्ट पहुंची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। पुलिस को वहां कांग्रेस का कोई भी पार्षद नहीं मिला, बल्कि इसके विपरीत वहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित पार्षदों की बाड़ेबंदी पाई गई। रिसॉर्ट में लक्ष्मणगढ़ और राजगढ़ से आए करीब 60 लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई थी, जिसकी बुकिंग एक ट्रैवल एजेंट के माध्यम से हुई थी।
मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने खुद को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का सहायक बताया, जिससे मामले ने और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ लिया। हालांकि, पुलिस की तलाशी के दौरान शिकायतकर्ता के भाई योगेश शर्मा और उनका परिवार वहां मौजूद नहीं मिला। पुलिस ने रिसॉर्ट के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की, लेकिन वहां भी पीड़ित परिवार की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
परिजनों का दावा और पुलिस की कार्रवाई
राकेश शर्मा का कहना है कि 10 सितंबर को उनके भाई को कुछ लोग अपने साथ ले गए थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही वे रिसॉर्ट पहुंचे, उन्होंने एक एसयूवी में अपने भाई और भाभी को जाते हुए देखा, लेकिन उनके साथ बच्चे नहीं थे। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। परिवार का कहना है कि योगेश के लापता होने के बाद से उनकी मां की तबीयत भी बिगड़ गई है।
मामले की जांच कर रहे रामगढ़ चौकी के अधिकारी कृपाल ने स्पष्ट किया कि पुलिस को मिली लिखित शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की गई थी। हालांकि, रिसॉर्ट में की गई गहन तलाशी के दौरान शिकायतकर्ता का भाई वहां नहीं मिला। पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की जांच कर रही है।
यह घटना निकाय चुनावों के बाद राजस्थान की राजनीति में मची हलचल को दर्शाती है। जहां एक ओर पार्षद के परिवार ने अपहरण की आशंका जताई थी, वहीं दूसरी ओर रिसॉर्ट में बीजेपी समर्थित पार्षदों की मौजूदगी ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। फिलहाल पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि पार्षद और उनका परिवार आखिर कहां है और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली सूत्रधार कौन है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!