अलीगढ़: भाजपा नेता विजय सिंह पप्पू ने थामा सपा का दामन, बरौली विधानसभा की सियासत में हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 से पहले अलीगढ़ की सियासत में दल-बदल का सिलसिला शुरू होता दिखाई दे रहा है। पूर्व मंत्री और चार बार के विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र ठाकुर विजय सिंह पप्पू ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में बरौली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के संभावित दावेदार रहे ठाकुर विजय सिंह पप्पू ने गुरुवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। विजय सिंह के इस कदम ने स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
परिवार की राजनीतिक विरासत और दल-बदल
विजय सिंह पप्पू पूर्व मंत्री और बरौली से चार बार विधायक रहे ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र हैं। उन्होंने स्वयं फोन पर समाजवादी पार्टी में शामिल होने की पुष्टि की है। सपा के जिला महासचिव मनोज यादव ने भी इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में विजय सिंह को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है। विजय सिंह ने फिलहाल अपनी आगे की रणनीति पर चुप्पी साधे रखी है और कहा है कि वे इस पर विस्तार से चर्चा बाद में करेंगे।
विजय सिंह के इस फैसले से उनके परिवार की राजनीतिक स्थिति भी चर्चा में आ गई है। उनके बड़े भाई अजय सिंह लंबे समय से भाजपा के साथ जुड़े रहे हैं और क्षेत्र में सक्रिय हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों भाइयों ने बरौली सीट से भाजपा का टिकट पाने के लिए दावेदारी पेश की थी। हालांकि, उस समय पार्टी ने तत्कालीन विधायक दलवीर सिंह का टिकट काटकर ठाकुर जयवीर सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था।
बरौली का राजनीतिक इतिहास और दलवीर सिंह का प्रभाव
बरौली विधानसभा सीट पर ठाकुर दलवीर सिंह का प्रभाव दशकों तक रहा है। छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत करने वाले दलवीर सिंह ने डीएस कॉलेज अलीगढ़ से छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में जनता दल, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और अंत में भारतीय जनता पार्टी जैसे विभिन्न दलों के साथ काम किया। 2017 में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल करने के बाद वे प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने थे।
दलवीर सिंह के परिवार का प्रभाव केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि उनके पुत्र और पुत्रवधू भी ब्लॉक प्रमुख जैसे पदों पर रहकर स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अब परिवार के दो प्रमुख चेहरों का अलग-अलग राजनीतिक दलों में होना बरौली की आगामी चुनावी जंग को और अधिक दिलचस्प बना रहा है।
2027 के चुनावों पर असर
विजय सिंह पप्पू के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद बरौली विधानसभा सीट पर दावेदारी को लेकर नए कयास लगाए जा रहे हैं। जहां भाजपा में उनके बड़े भाई अजय सिंह की सक्रियता बनी हुई है, वहीं विजय सिंह का सपा में जाना विपक्षी खेमे को मजबूती देने का प्रयास माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सपा उन्हें किस भूमिका में देखती है और बरौली से उनकी दावेदारी का स्वरूप क्या होगा।
इस पूरे घटनाक्रम पर अजय सिंह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बरौली की राजनीति में और भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि सभी प्रमुख दल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!