अजमेर नगर निगम चुनाव: वार्ड आरक्षण लॉटरी से बदला सियासी समीकरण, कई दिग्गज नेताओं को तलाशनी होगी नई जमीन
नगर निगम अजमेर के चुनाव के लिए वार्डों की आरक्षण लॉटरी सोमवार को निकली। इससे राजनीतिक चौसर में नया समीकरण बनने की तस्वीर दिखाई देने लगी है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

आरक्षण लॉटरी के बाद अजमेर में सियासी हलचल
अजमेर नगर निगम चुनाव के लिए हाल ही में संपन्न हुई वार्ड आरक्षण लॉटरी ने शहर की राजनीतिक बिसात पूरी तरह से बदल दी है। सोमवार को निकाली गई इस लॉटरी प्रक्रिया के बाद कई मौजूदा पार्षदों और बड़े नेताओं के सामने अपना चुनावी भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। वार्डों की श्रेणी बदलने से जहां कई दावेदारों की उम्मीदों को झटका लगा है, वहीं कुछ नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान तैयार हो गया है।
लॉटरी के नतीजों के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कई दिग्गज नेताओं को अब अपने पुराने वार्ड छोड़कर नई जमीन तलाशनी पड़ सकती है। वार्डों के आरक्षण में हुए बदलाव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी निगम चुनाव में टिकट वितरण और चुनावी रणनीति में काफी फेरबदल देखने को मिलेगा।
दिग्गज नेताओं के सामने संकट
आरक्षण की मार सबसे ज्यादा उन नेताओं पर पड़ी है जिनके वार्ड अब आरक्षित श्रेणी में आ गए हैं। भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी, जो वर्तमान में वार्ड 71 से पार्षद हैं, का वार्ड अब ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो गया है। इसी तरह, पूर्व में विधायक का चुनाव लड़ चुके ज्ञान सारस्वत का वार्ड भी ओबीसी महिला श्रेणी में चला गया है। डिप्टी मेयर रहे नीरज जैन का वार्ड 66 भी अब ओबीसी के लिए आरक्षित हो चुका है।
कांग्रेस खेमे में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। पूर्व डिप्टी कमिश्नर गजेंद्र सिंह रलावता का वार्ड 72 अब ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो गया है। इसके अलावा, तीन बार पार्षद रह चुकीं रश्मि हिंगोरानी का वार्ड 26 अब एससी ओपन श्रेणी में आ गया है। इन सभी नेताओं को अब चुनाव लड़ने के लिए नए वार्डों की तलाश करनी होगी।
नए परिसीमन और ग्रामीण क्षेत्रों का जुड़ाव
इस बार के चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होंगे, जिसमें पहली बार हाथीखेड़ा ग्राम पंचायत के बोराज, काजीपुरा और हाथीखेड़ा जैसे राजस्व गांवों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों के निवासी पहली बार निगम चुनाव में अपने पार्षद का चयन करेंगे। इस विस्तार से निगम क्षेत्र का दायरा बढ़ा है और मतदाताओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
दूसरी ओर, मेयर पद के लिए अनारक्षित महिला श्रेणी होने के कारण महिलाओं की दावेदारी बढ़ना तय माना जा रहा है। वर्तमान बोर्ड में 34 महिला पार्षद थीं, लेकिन इस बार यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। 27 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने के साथ ही अन्य सामान्य वार्डों में भी महिला प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ेगी।
टिकट वितरण और बागियों की भूमिका
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट वितरण के बाद दोनों प्रमुख दलों में गुटबाजी बढ़ सकती है। टिकट न मिलने से नाराज होने वाले बागी नेता चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा में विधायक वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, तो वहीं कांग्रेस में राजकुमार जयपाल और महेंद्र सिंह रलावता जैसे नेता टिकट वितरण की प्रक्रिया में मुख्य सूत्रधार होंगे।
हालांकि, कुछ नेताओं के लिए राहत की बात यह है कि उनके वार्डों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान मेयर ब्रजलता हाड़ा और प्रतिपक्ष नेता द्रोपदी कोली अपने पुराने वार्डों से ही दावेदारी पेश कर सकती हैं। वहीं, पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत और सुरेन्द्र सिंह शेखावत के वार्ड भी अनारक्षित बने हुए हैं, जिससे उन्हें अपनी पुरानी रणनीति पर काम करने की सुविधा होगी।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!