आगरा में ग्रीन गैस मीटर अपडेट के नाम पर साइबर जालसाजों का आतंक, दो लोगों के खातों से उड़ाए 11.51 लाख
आगरा में साइबर अपराधियों ने 11 सितंबर को दो लोगों को ग्रीन गैस मीटर अपडेट करने और सीआरएन नंबर देखने के बहाने 11.51 लाख रुपये ठग लिए। दोनों को एपीके फाइल भेजकर उनके मोबाइल हैक करके खातों से रकम निकाल ली।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

ग्रीन गैस मीटर अपडेट के नाम पर ठगी का जाल
आगरा में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर से आम लोगों को अपना निशाना बनाया है। इस बार ठगों ने ग्रीन गैस मीटर को अपडेट करने और सीआरएन नंबर चेक करने का झांसा देकर दो लोगों के बैंक खातों से कुल 11.51 लाख रुपये की चपत लगा दी है। अपराधी लोगों को एक संदिग्ध एपीके फाइल भेजकर उनके मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लेते हैं और फिर पलक झपकते ही खाते खाली कर देते हैं।
घटना के अनुसार, 11 सितंबर को शाहगंज के पुष्पनगर निवासी प्रभाकर को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉलर ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए मीटर अपडेट करने का बहाना बनाया। उसने प्रभाकर के मोबाइल पर एक एपीके फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने का दबाव डाला। जैसे ही प्रभाकर ने ऐप इंस्टॉल किया, उनका मोबाइल हैक हो गया और उनके खाते से 5.37 लाख रुपये की अवैध निकासी हो गई।
कैसे काम करता है यह खतरनाक गिरोह
इसी तरह की एक अन्य घटना ताजगंज के पुरानी मंडी निवासी अजय कुमार गुप्ता के साथ हुई। उन्हें 10 सितंबर को फोन कर सीआरएन नंबर देखने के लिए एक फाइल भेजी गई। फाइल डाउनलोड करते ही उनका फोन हैक हो गया और अगले दिन 11 सितंबर को उनके खाते से 6.14 लाख रुपये निकाल लिए गए। दोनों ही मामलों में पीड़ितों को तब पता चला जब उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने के मैसेज आए।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ये अपराधी 'रिमोट एक्सेस' ऐप का उपयोग करते हैं। एक बार एपीके फाइल डाउनलोड होने के बाद, अपराधी पीड़ित के फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। इससे वे न केवल बैंक खातों की जानकारी चुरा लेते हैं, बल्कि ओटीपी भी खुद ही पढ़ लेते हैं, जिससे सुरक्षा की सारी परतें टूट जाती हैं।
सतर्कता से बची कई लोगों की जमा-पूंजी
हालांकि, शहर के अन्य हिस्सों में लोग अब जागरूक हो रहे हैं। दयालबाग स्थित पुष्पांजलि बाग कॉलोनी में भी कई निवासियों को इसी तरह के फर्जी मैसेज भेजे गए थे। अंकित अरोरा, आरती गिहानी, अरुण गुप्ता समेत कई अन्य लोगों ने समय रहते सतर्कता दिखाई और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं किया। कॉलोनी के व्हाट्सएप ग्रुप पर सूचना साझा कर उन्होंने अन्य लोगों को भी इस ठगी से बचा लिया।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन गैस या किसी भी अन्य कंपनी के नाम पर भेजी जाने वाली किसी भी एपीके फाइल को डाउनलोड करना बेहद खतरनाक है। उन्होंने बताया कि अब तक इस तरह की ठगी के एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए ऐप को इंस्टॉल न करें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि किसी के साथ इस तरह की धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से पुलिस द्वारा ट्रांजेक्शन को रोकने की संभावना बनी रहती है। प्रभाकर ने भी घटना के तुरंत बाद 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस प्रशासन ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी कंपनी के आधिकारिक ऐप को केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक या फाइल पर भरोसा न करें। साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, इसलिए डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना ही एकमात्र बचाव है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!