आगर-मालवा: बगलामुखी मंदिर के पास नाले में गिरी कार, 8 लोगों की दर्दनाक मौत; प्रशासन की लापरवाही आई सामने
आगर–मालवा में मां बगलामुखी मंदिर के पास ओडिशा के श्रद्धालुओं की कार नाले में गिर गई। मंदिर से करीब 60 फीट दूर हुए हादसे से पुलिस–प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मंदिर दर्शन के बाद लौटते समय हुआ हादसा
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के समीप शनिवार देर रात एक हृदयविदारक हादसा हुआ। ओडिशा से आए श्रद्धालुओं से भरी एक कार अनियंत्रित होकर करीब 20 फीट गहरे बरसाती नाले में जा गिरी। इस दुर्घटना में कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थे। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक श्रद्धालु उज्जैन से किराए की कार लेकर दर्शन के लिए पहुंचे थे। रात करीब 12:07 बजे मंदिर से लौटते समय तेज बारिश के बीच कार पुलिया से गुजरते हुए सीधे नाले में समा गई। हादसे के समय पुलिया के ऊपर करीब 4 फीट पानी बह रहा था, जिससे ड्राइवर को रास्ते का अंदाजा नहीं लग सका।
प्रशासनिक चूक और सुरक्षा के दावों की पोल
घटनास्थल का मुआयना करने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नदारद मिले। पुलिया के पास न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा था और न ही बैरिकेड्स की व्यवस्था थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के मुख्य मार्ग पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती केवल दिखावा है। बारिश के दौरान जब पुलिया पर पानी का स्तर बढ़ जाता है, तब भी वहां वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं किए जाते।
प्रशासन की एक बड़ी चूक यह भी सामने आई है कि कलेक्टर द्वारा मंदिर समिति को दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हुआ। 18 अगस्त को जारी आदेश में समिति को पीडब्ल्यूडी के बैरिकेड्स लौटाकर अपने स्तर पर सुरक्षा इंतजाम करने को कहा गया था, लेकिन समिति ने न तो नए बैरिकेड्स लगाए और न ही सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाई।
सीसीटीवी फुटेज से खुला लापरवाही का राज
पुलिस द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि कार पुलिया से आगे बढ़ते ही गहरे नाले में गिर गई। इसी फुटेज में यह भी सामने आया कि उसी रात करीब 11:10 बजे दो अन्य लोग भी नाले में गिरे थे, जो किसी तरह तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे। हालांकि, इस घटना की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई, जिससे प्रशासन को खतरे का पहले से आभास नहीं हो सका।
यह पहली बार नहीं है जब इस स्थान पर हादसा हुआ हो। वर्ष 2016 में भी इसी नाले में एक कार गिरी थी, जिसमें सवार लोगों को बमुश्किल बचाया गया था। स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस पुलिया के चौड़ीकरण और उसे ऊंचा करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थाओं पर उठते सवाल
मंदिर परिसर में पार्किंग के नाम पर शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन वहां की स्थिति बदतर है। कच्चा मैदान होने के कारण बारिश में वहां कीचड़ हो जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, मंदिर समिति के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद और दान-दक्षिणा को लेकर मचे घमासान के कारण भी व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं।
फिलहाल, इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अब प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!