राजनीतिक आरोपों पर अभिजीत दीपके का पलटवार, बोले- हम किसी की 'बी टीम' नहीं, छात्रों के साथ हैं
कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी संस्था को कांग्रेस या आम आदमी पार्टी की ‘बी टीम’ बताए जाने के आरोपों को खारिज किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कहते हैं कि मैं कांग्रेस की बी टीम हूं और कुछ लोग कहते हैं कि मैं आम आदमी पार्टी की बी टीम हूं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी सीजेपी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने हाल ही में अपनी पार्टी पर लग रहे राजनीतिक आरोपों का कड़ा खंडन किया है। पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में सीजेपी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसमें इसे प्रमुख राजनीतिक दलों की 'बी टीम' करार दिया जा रहा था। दीपके ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी संस्था का उद्देश्य किसी दल की मदद करना नहीं, बल्कि छात्रों के हितों के लिए काम करना है।
दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उन्हें कांग्रेस की 'बी टीम' बताते हैं, जबकि अन्य लोग उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पहले आपस में बैठकर यह तय कर लेना चाहिए कि वे वास्तव में किसके साथ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीजेपी किसी भी पार्टी की बी टीम नहीं है, बल्कि वे खुद को छात्रों की 'ए टीम' मानते हैं और उनका पूरा ध्यान शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर केंद्रित है।
सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं की डिग्री पर सवाल
शिक्षा के मुद्दे को लेकर मुखर रहे अभिजीत दीपके ने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की वकालत की है। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक पदों पर आसीन हैं, उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता और डिग्री को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए। दीपके के अनुसार, किसी भी नेता की डिग्री पर सवाल उठाना जनता का अधिकार है और संबंधित व्यक्ति का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह अपने शैक्षणिक प्रमाणों को सार्वजनिक करे।
उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों को बेहतर बनाने की मुहिम किसी एक संगठन का एजेंडा नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य और बच्चों के विकास से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। दीपके ने सवाल उठाया कि भाजपा जैसी पार्टियों को शिक्षा सुधार की मुहिम पर आपत्ति क्यों है, जबकि अन्य दल भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, स्कूलों में सुधार की वकालत करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत किया जाना चाहिए।
सीजेपी-डेमोक्रेटिक से चुनौती और आंतरिक कलह
अभिजीत दीपके के लिए चुनौतियां केवल बाहरी राजनीतिक दलों से ही नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के भीतर से भी बढ़ रही हैं। हाल ही में नई दिल्ली में 'सीजेपी-डेमोक्रेटिक' नामक एक नए गुट का गठन किया गया है। इस गुट के संस्थापक मनीष ब्रह्मभट्ट ने दीपके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि दीपके और आम आदमी पार्टी के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है, जिसके कारण सीजेपी की टीम में केवल आप नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
मनीष ब्रह्मभट्ट, जो पहले सीजेपी के साथ ही जुड़े हुए थे, अब इस नए संगठन के माध्यम से दीपके की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सीजेपी अपनी राजनीतिक पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। दिल्ली में इस नए गुट का उदय दीपके के लिए एक नई राजनीतिक मुश्किल के रूप में देखा जा रहा है।
कानूनी मोर्चे पर मिली राहत
राजनीतिक विवादों के बीच सीजेपी के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। यह आदेश देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर प्रभावी होगा। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कानूनी राहत के बाद अब सीजेपी का ध्यान आगामी गतिविधियों पर है। अभिजीत दीपके के बयानों और नए गुट के गठन के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में सीजेपी अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और छात्रों के मुद्दों को लेकर वे किस तरह आगे बढ़ते हैं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!