यूपी में सरोगेसी का खुलासा: लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था कोख बेचने का अवैध धंधा

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यूपी में सरोगेसी का खुलासा: लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था कोख बेचने का अवैध धंधा, लखनऊ, 2023: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अवैध सरोगेसी और कथित रूप से संगठित रैकेट चलाने के आरोप लगाए गए हैं। मामला इटौंजा क्षेत्र में स्थित सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां अस्पताल के संचालक अफजल अंसारी पर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक महीने तक चली जांच में इस पूरे नेटवर्क से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था, जिसमें कई स्थानों पर ऐसे सेंटर चलाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आए कथित बयानों में यह संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क उन दंपतियों को टारगेट करता था, जो संतान प्राप्ति में असफल रहे हैं और जिनके लिए सामान्य IVF प्रक्रियाएं भी सफल नहीं हो पाई थीं। आरोपों के अनुसार, ऐसे मामलों में अलग-अलग तरह की सरोगेसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाता था, जिसे कानून के दायरे से बाहर बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि महिलाओं के चयन और प्रक्रिया से जुड़े मामलों में आर्थिक लेन-देन की बात सामने आई है, जिसमें परिस्थितियों और अन्य मानकों के आधार पर अलग-अलग राशि तय किए जाने के आरोप शामिल हैं। हालांकि, इस तरह की सभी जानकारियां जांच रिपोर्ट और कथित खुलासों पर आधारित हैं।

इस मामले में यह भी सामने आया है कि कथित रूप से इस नेटवर्क को इस तरह से संचालित किया जाता था ताकि निगरानी और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि संचालन के तरीके को अलग-अलग स्थानों पर फैलाकर रखा गया था, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो सके।

एक कथित सरोगेट महिला का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है, जिसे इस नेटवर्क से जोड़ा गया बताया गया है। हालांकि, उसकी पहचान और भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि भारत में सरोगेसी को लेकर सख्त कानून लागू है। सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत केवल परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy) की अनुमति है, जबकि व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून के अनुसार, इस नियम का उल्लंघन करने पर 5 से 10 साल तक की सजा और 10 से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

अफजल ने खुलासा किया कि वह जानबूझकर राज्य बदलकर नेटवर्क चलाता है ताकि निगरानी से बच सके। उसने एक सरोगेट महिला ‘सीता’ का भी परिचय कराया जो गोरखपुर की रहने वाली है और इससे पहले भी बच्चे पैदा कर चुकी है।

सरोगेसी विनियमन अधिनियम 2021 के तहत भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है जबकि व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है। इस कानून का उल्लंघन करने पर 5 से 10 साल की सजा और 10 से 25 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।

इस पूरे मामले ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और सरोगेसी से जुड़े नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून का गंभीर उल्लंघन होगा बल्कि चिकित्सा नैतिकता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाएगा।

फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच की बात सामने आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि पाई जाती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अभी जांच के दायरे में है, इसलिए सभी आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। लेकिन इसने निश्चित रूप से सरोगेसी और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर बहस को तेज कर दिया है।

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