दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट ठगी का बड़ा खुलासा, 78 वर्षीय बुजुर्ग से 2.19 करोड़ की साइबर ठगी

दिल्ली में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 78 वर्षीय बुजुर्ग से 2.19 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक से लेकर फैक्ट्री मालिक तक शामिल
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश निवासी 30 वर्षीय दीपेश पाटीदार (इलेक्ट्रॉनिक रिपेयर शॉप संचालक), 28 वर्षीय अंशुल राठौड़ (डीजे और म्यूजिक सिस्टम किराये पर देने वाला), 36 वर्षीय श्याम बाबू गुप्ता (उत्तर प्रदेश के झांसी में प्लास्टिक प्लेट फैक्ट्री संचालक), 25 वर्षीय राघवेंद्र वर्मा (बाइक एक्सेसरीज़ दुकानदार) और 25 वर्षीय देवेश सिंह (आईटीआई डिप्लोमा होल्डर, हाल ही में बीटेक में दाखिला लिया) के रूप में हुई है।

डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर रची साजिश
मामले की शुरुआत तब हुई जब बुजुर्ग को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय का वरिष्ठ अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि पीड़ित के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। उम्र का हवाला देकर थाने आने में असमर्थता जताने पर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ की कहानी गढ़ी और फर्जी केस दस्तावेज दिखाकर बुजुर्ग को डराया।

फर्जी CBI ऑफिस और वकील का नाटक
आरोपियों ने पीड़ित को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और घर से बाहर न निकलने तथा किसी से संपर्क न करने के निर्देश दिए। इस दौरान फर्जी CBI ऑफिस दिखाया गया और एक व्यक्ति को वकील बनाकर भी बात करवाई गई। ठगों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि रकम RBI के सत्यापन खातों में जमा की जा रही है।

26 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच ट्रांसफर हुई रकम
डर और दबाव में आकर बुजुर्ग ने 26 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2 करोड़ 19 लाख 18 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

जांच में हुआ पूरे गिरोह का पर्दाफाश
5 दिसंबर को ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल सुरागों की जांच शुरू की। जांच में करीब 1 करोड़ रुपये दीपेश पाटीदार के खाते में ट्रेस हुए, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी की गई। पूछताछ के दौरान पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।

अहम सबूत बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, चेकबुक, रबर स्टांप और आधार कार्ड की प्रतियां बरामद की हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और कहीं और ऐसे मामलों में भी यह गिरोह शामिल तो नहीं रहा है।

नोट: पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी तरह की ‘डिजिटल अरेस्ट’, फर्जी CBI या पुलिस कॉल से सावधान रहें और ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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