केंद्र ने पशु-आधारित खाद की अनुमति वापस ली

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2 oct. 2025 केंद्र सरकार ने 13 अगस्त 2025 को जारी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है जिसमें कसाईखानों (स्लॉटरहाउस) से निकले पशु अवशेषों से बने बायोस्टिमुलेंट (खाद) के प्रयोग की इजाज़त दी गई थी। जैनी और शाकाहारी संगठनों के विरोध के बाद यह कदम 30 सितंबर 2025 को उठाया गया। अब 11 प्रकार के पशु-आधारित प्रोटीन हाइड्रोलाइज़ेट (प्रविष्टि सं. 1, 2, 8, 14, 15, 16, 17, 21, 26, 30, 33) की अनुमति वापस ले ली गई है और इनके निर्माण, आयात, बिक्री तथा भंडारण पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

मुख्य बिंदु (पुनर्लिखित):

  • 13 अगस्त 2025 को कृषि मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से स्लॉटरहाउस-उत्पन्न पदार्थों से बने बायोस्टिमुलेंट को कुछ फसलों में उपयोग की अनुमति दी थी।
  • इस फैसले के खिलाफ जैनी समुदाय और अन्य शाकाहारियों ने तीव्र आपत्ति जताई — उनका कहना था कि बूचड़खाने के अवशेषों से बनी खाद धार्मिक भावनाओं का अपमान कर सकती है और उपभोक्ताओं में असंतोष पैदा कर सकती है।
  • शाकाहार समर्थक डॉ. पुष्पेंद्र सहित कई लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर अधिसूचना को रद्द करने का अनुरोध किया।
  • विरोध के बाद मंत्रालय ने देशभर में खाद कंपनियों के बायोस्टिमुलेंट की जाँच करवाई; जाँच में पशु-स्रोत पुष्टि होने पर करीब 150 से अधिक कंपनियों के उत्पादों पर रोक लगाई गई।
  • नई अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जिन 11 प्रविष्टियों का उल्लेख है, उन पर अब से कोई वैधता नहीं रहेगी — पहले जिन फसलों में इनका उपयोग सुझाया गया था (जैसे आलू, टमाटर, मिर्च, सोयाबीन, धान) अब उन पर यह लागू नहीं होगा।
  • मौजूदा समय में इन उत्पादों का निर्माण, आयात, बिक्री, भंडारण और प्रदर्शन सभी पर रोक लागू है और संबंधित कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं।

प्रभाव और टिप्पणियाँ:

  • कृषि संबंधी कुछ कंपनियों ने पहले ही पशु-आधारित खाद का उत्पादन शुरू कर दिया था; अब उनके संचालन पर तुरंत असर पड़ा है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से धार्मिक-समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता स्तर पर चिंता कम हो सकती है, परंतु खाद्य सुरक्षा व पोषण के वैज्ञानिक पहलुओं पर चल रही बहस अभी बनी रहेगी।
  • नियामक ढांचे में बदलाव के कारण बाजार में इन प्रकार के बायोस्टिमुलेंट की उपलब्धता और आयात-नियमों पर भी असर पड़ेगा।

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